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एण्डटीवी के कलाकारों ने बताए गुड़ी पाड़वा सेलीब्रेशन प्लांस

गुड़ी पाड़वा को नए साल की खुशियों और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। रंग-बिरंगी रंगोलियों, शुभ गुड़ी की स्थापना और पारंपरिक व्यंजनों के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार उत्साह, परंपरा और परिवार के साथ बिताए गए पलों की याद दिलाता है। एण्डटीवी के कलाकारों के लिए भी यह दिन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यादों को फिर से जीने, अपनों के साथ समय बिताने और नए साल का स्वागत उम्मीद और सकारात्मकता के साथ करने का अवसर है। उन्होंने इस मौके पर अपने खास अनुभव और इस साल के जश्न की योजनाएँ साझा कीं। इन कलाकारों में शामिल हैं, अमिताभ घानेकर (‘घरवाली पेड़वाली‘ में पनौती मामा) और शिल्पा शिंदे (‘भाबीजी घर पर हैं 2.0‘ में अंगूरी भाबी)।

अमिताभ घाणेकर ऊर्फ एण्डटीवी के ‘घरवाली पेड़वाली‘ के पनौती मामा ने कहा, “गुड़ी पाड़वा मेरे लिए हमेशा से परंपरा, परिवार और नई शुरुआत का त्योहार रहा है। महाराष्ट्र में अपने घर पर परिवार के साथ इसे मनाने की कई खूबसूरत यादें हैं। हमारे घर के बाहर गुड़ी स्थापित करना सबसे खास पल होता था, जो विजय, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मेरी मां पूरन पोली, बटाटा भाजी और श्रीखंड जैसे व्यंजनों के साथ शानदार दावत तैयार करती थीं और हम सभी पूजा के बाद साथ बैठकर भोजन करते थे। रंगोली, नए कपड़े और पड़ोसियों-दोस्तों की शुभकामनाओं से पूरा माहौल उत्सवमय हो जाता था। इस साल भी मैं अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के साथ-साथ सेट पर अपने सह-कलाकारों के साथ इसकी खुशियाँ साझा करने वाला हूँ। ऐसे त्योहार हमें थोड़ा रुककर अपनी परंपराओं को याद करने और सकारात्मकता के साथ नए साल का स्वागत करने की प्रेरणा देते हैं।” शिल्पा शिंदे, जोकि एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं 2.0‘ में अंगूरी भाबी का किरदार निभा रही हैं, ने बताया, “गुड़ी पाड़वा मेरे दिल के बेहद करीब है, क्योंकि यह मुझे घर की गर्माहट और महाराष्ट्र की खूबसूरत परंपराओं की याद दिलाता है। बचपन में मुझे अपने मोहल्ले के हर घर के बाहर रंग-बिरंगी गुड़ियाँ लहराते देखना बहुत अच्छा लगता था। मेरी मां सुबह-सुबह उठकर पूरन पोली और श्रीखंड जैसे व्यंजन बनाती थीं और उनकी खुशबू से पूरा घर महक उठता था। हम पारंपरिक कपड़े पहनकर रिश्तेदारों से मिलने जाते और नए साल की शुभकामनाएँ देते थे। आज भी मैं इस त्योहार को सादगी और अपनेपन के साथ मनाना पसंद करती हूँ-पूजा करना, परिवार के साथ समय बिताना और पारंपरिक महाराष्ट्रीयन भोजन का आनंद लेना मेरे लिए इस दिन की सबसे बड़ी खुशी है। मेरे लिए गुड़ी पड़वा सकारात्मकता, आभार और मुस्कान के साथ नई शुरुआत का प्रतीक है।”

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