Governor : मूवी रिव्यू
डायरेक्टर: चिन्मय डी. मंडलेकर
कास्ट: मनोज बाजपेयी, अदा शर्मा, नौशाद मोहम्मद कुंजू, मधू शाह, कृषा कुरुप, परितोष सैंड
कहानी क्या है?
‘Governor’ 1990-1991 के भारत के आर्थिक संकट पर आधारित फाइनेंशियल थ्रिलर है। फिल्म तत्कालीन RBI गवर्नर एस. वेंकटरमणन से प्रेरित किरदार ए. रमनन की कहानी दिखाती है। खाड़ी युद्ध की वजह से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार खतरनाक स्तर तक गिर गया था और देश दिवालिया होने के कगार पर था। ऐसे में एक गवर्नर कैसे राजनीतिक दबाव, भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी के बीच देश को बचाने की कोशिश करता है, यही फिल्म का दिल है।

क्या अच्छा है
- मनोज बाजपेयी की एक्टिंग: मनोज बाजपेयी ने RBI गवर्नर के रोल में संयमित और दमदार परफॉर्मेंस दी है। उनके किरदार में गंभीरता, नैतिक जटिलता और शांत नेतृत्व साफ़ दिखता है। साउथ इंडियन डायलैक्ट और बॉडी लैंग्वेज किरदार को असली बनाते हैं। प्रोड्यूसर विपुल शाह के मुताबिक “लोग मनोज बाजपेयी को ‘Governor’ में पहले कभी ना देखा गया अंदाज़ में पसंद करेंगे”।
- अनोखा सब्जेक्ट: बैंकिंग क्राइसिस, फॉरेन रिज़र्व, गोल्ड गिरवी रखना – जैसे मुश्किल आर्थिक विषय को मेनस्ट्रीम सिनेमा के लिए एक्सेसिबल बनाया गया है। यंग ऑडियंस के लिए 1991 के संकट को समझने का ये अच्छा ज़रिया है।
- प्रोडक्शन डिज़ाइन: 1990 के दशक का माहौल, सरकारी दफ्तर और मीडिया का सेटअप असली लगता है। सिनेमेटोग्राफी और पीरियड विजुअल्स टेंशन बढ़ाते हैं।
- सपोर्टिंग कास्ट: अदा शर्मा पत्रकार अदिति वर्मा के रोल में सिन्सियर लगी हैं और हल्के-फुल्के पल कहानी को बैलेंस करते हैं। मधू शाह और नौशाद मोहम्मद कुंजू ने भी गरिमा के साथ सपोर्ट किया।
क्या काम नहीं करता
- धीमी रफ़्तार: इंटरवल से पहले फिल्म की पेसिंग असमान हो जाती है। कई डायलॉग-हैवी सीन लंबे खिंचते हैं और मोमेंटम तोड़ते हैं।
- गहराई की कमी: फिल्म सिर्फ़ प्रशासनिक कामयाबी का जश्न मनाती है, लेकिन ये नहीं पूछती कि भारत ऐसी हालत में पहुंचा ही क्यों। इकोनॉमिक क्राइसिस के पीछे के कारणों पर चर्चा नहीं होती।
- किरदारों का विकास: मनोज बाजपेयी के अलावा बाकी किरदार अंडररिटन लगते हैं। कई सीक्वेंस ड्रामैटिक लगे, जिससे ऐतिहासिक प्रामाणिकता थोड़ी कम हुई।
- कास्टिंग पर सवाल: Filmfare के रिव्यू में सवाल उठा कि तमिल ब्यूरोक्रेट के रोल के लिए मनोज बाजपेयी सही चॉइस थे या नहीं – कल्चरल स्पेसिफिसिटी के लिए कोई साउथ इंडियन एक्टर बेहतर होता।
टेक्निकल पहलू
म्यूज़िक अमित त्रिवेदी का है और बैकग्राउंड स्कोर मन्नान शाह ने दिया है। एडिटिंग साफ़ है लेकिन कुछ सीन ट्रिम हो सकते थे। साउंड डिज़ाइन सस्पेंस बढ़ाता है।
वर्डिक्ट
‘Governor’ एक महत्वाकांक्षी और रिफ्रेशिंग कोशिश है जो भारत के आर्थिक इतिहास के अहम चैप्टर को बड़े पर्दे पर लाती है। मनोज बाजपेयी की वजह से फिल्म देखी जा सकती है। ये फिल्म देशभक्ति दिखाती है लेकिन उतनी थ्रिल या इमोशनल पंच नहीं दे पाती जितनी उम्मीद थी। अगर आपको इतिहास, पॉलिटिक्स और मनोज बाजपेयी की एक्टिंग पसंद है तो थिएटर में देख सकते हैं। वरना धीमी रफ़्तार के लिए तैयार रहें।
रेटिंग: 3/5
कहां देखें: 12 जून 2026 से सिनेमाघरों में, करीब 750 स्क्रीन्स पर रिलीज़