रिव्यूज़

धुरंधर द रिवेंज रिव्यू : पहली फिल्म की योग्य उत्तराधिकारी

कहानी : धुरंधर द रिवेंज भारतीय जासूस जसकीरत सिंह रंगी उर्फ़ हमजा अली मज़ारी (रणवीर सिंह) की कहानी जारी रखती है, जिसने पाकिस्तान के अंडरवर्ल्ड और राजनीति में सेंध लगाई है। पहले भाग के अंत में रहमान डाकैट (अक्षय खन्ना) की मौत के बाद उसका दुश्मन अरशद पप्पू (अश्विन धर) कराची के ल्यारी अंडरवर्ल्ड पर काबिज हो जाता है। इससे रहमान का चचेरा भाई और सेकंड-इन-कमांड उज़ैर बलूच (दानिश पंडोर) बौखला जाता है। वह, हमजा और अन्य लोग अरशद के गिरोह के खिलाफ युद्ध छेड़ते हैं।

आखिरकार उज़ैर अरशद को बेरहमी से मारकर ल्यारी पर गैंग का दबदबा वापस ले लेता है। हालात ऐसे बनते हैं कि वह हट जाता है और हमजा ल्यारी का किंग और शेर-ए-बलूच बन जाता है। इसी बीच हमजा को पता चलता है कि ISI प्रमुख मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) और सहयोगी भारत में एक और आतंकी हमले की योजना बना रहे हैं। फिल्म जसकीरत के R&AW जासूस बनने से पहले के जीवन को भी दिखाती है।

लेखन-निर्देशन : पहले भाग के ल्यारी-अंडरवर्ल्ड के बाद दूसरे भाग में वही दुनिया मिलने की उम्मीद थी, लेकिन आदित्य धर पंजाब के गाँव में जसकीरत के अतीत से शुरुआत कर चौंकाते हैं। धीरे-धीरे कथा ल्यारी लौटती है और पूरी तरह बाँध लेती है। लगभग 4 घंटे की रफ़्तार भरी पटकथा में कोई सुस्त पल नहीं। एक आम पंजाबी लड़के का ल्यारी के अंडरवर्ल्ड से पाकिस्तान के महत्वपूर्ण राजनीतिक स्तंभ बनने तक का आर्क उल्लेखनीय है, सिनेमाई छूटें कम रखकर। हैमलीन जासूस की पहचान के उजागर होने के बाद दूसरे भाग में ड्रामा और तनाव बढ़ता है, कई क्षण दर्शकों को किनारे पर रखते हैं। “बड़े साहब” की पहचान अनुमानित है, पर एक मुख्य किरदार का अंतिम खुलासा चौंकाता है। पाकिस्तानी किरदारों के हमजा की असलियत जानने का हिस्सा समझदारी से हैंडल किया गया है और विस्फोटक क्लाइमैक्स देता है।

संगीत-तकनीक : तकनीकी रूप से फिल्म टॉप-नॉच है—एक्शन (ऐजाज़ गुलाब, सिया यंग ओह, यानिक बेन, रमज़ान बुलुत) कच्चा-विश्वसनीय, कैमरा (विकाश नवलखा) बड़ा स्केल देता है, एडिटिंग (शिवकुमार वी. पनिक्कर) चुस्त। शाश्वत सचदेव का संगीत पहले भाग जैसा नहीं, पर बैकग्राउंड स्कोर प्रभावी। पुराने हिंदी गानों का उपयोग (जैसे ‘हम प्यार करने वाले’) फिर कारगर।

प्रदर्शन : रणवीर सिंह पिछले भाग से भी ऊँचा उठते हैं—शारीरिक व भावनात्मक चुनौतियां दोनों संभालते हैं। अर्जुन रामपाल अधिक खतरनाक, आर. माधवन को ज्यादा स्पेस मिलता है, संजय दत्त संगति बनाए रखते हैं, दानिश पंडोर परिपक्व। राकेश बेडी (जमिल जमाली) शानदार, सारा अर्जुन सीमित पर महत्त्वपूर्ण दृश्यों में प्रभावी, गौरव गेरा, मानव गोहिल आदि सहायक भूमिकाओं में ठीक, नवाज़ शरीफ़ पर आधारित किरदार करने वाला अभिनेता उल्लेखनीय, यामी गौतम धर कैमियो में अच्छी।

कमियां : हिंसा-बर्बरता पहले भाग से कई गुना अधिक—कम हो सकती थी। प्रोटैगोनिस्ट-विलेन की अंतिम लड़ाई खिंची लगती है। मेजर इकबाल के पिता का सबप्लॉट हट सकता था, रनटाइम घटता। सबसे बड़ी खामी नोटबंदी को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताने की बेताब कोशिश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुले रूप से स्तुति—फिल्म को बहुत अच्छा से महान बनने से रोकती है।

कुल मिलाकर : धुरंधर द रिवेंज पहली फिल्म की योग्य उत्तराधिकारी है। आदित्य धर का परिपक्व निर्देशन चमकता है। प्रोपेगैंडा कम होता तो और प्रभावी होती, फिर भी कई मजबूत पक्षों से बॉक्स-ऑफ़िस रिकॉर्ड तोड़ने की संभावना।

रेटिंग: 3/5
निर्देशक: आदित्य धर
निर्माता: जियो स्टूडियोज़, बी62 स्टूडियोज़
लेखक: आदित्य धर (अतिरिक्त पटकथा-शिवकुमार वी. पनिक्कर, ओजस गौतम)
कलाकार: रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, संजय दत्त, राकेश बेडी, सारा अर्जुन

  • हर्षदा वेदपाठक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button