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द ताज स्टोरी में अनोखे अंदाज में परेश रावल

मुंबई – परेश रावल द्वारा अभिनीत, स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्रा. लि. और सीए सुरेश झा द्वारा प्रस्तुत तथा तुषार अमरीश गोयल द्वारा लिखित और निर्देशित ‘द ताज स्टोरी’, अपने धमाकेदार और सोचने पर मजबूर करने वाले ट्रेलर के चलते लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर विकास राधेश्याम हैं। फिलहाल रिलीज से पहले मेकर्स ने एक नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें परेश रावल एक गहन और तीव्र अंदाज़ में दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथ में न्याय का तराज़ू है, जिस पर ताज महल संतुलित है, जो स्पष्ट रूप से “सच्चाई बनाम इतिहास” की लड़ाई का संकेत देता है।

“क्या ताज महल एक मुग़ल आर्किटेक्चर है…?” विशेष रूप से इस टैगलाइन के साथ न सिर्फ फिल्म पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती देती है, बल्कि देशभर में बहस छेड़ने का वादा भी करती है। तुषार अमरीश गोयल द्वारा निर्देशित द ताज स्टोरी 31 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है, ऐसे में यह कहें तो गलत नहीं होगा कि सच को जानने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

परेश रावल, जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नमित दास जैसे दमदार कलाकारों से सजी यह फिल्म एक कठोर सामाजिक ड्रामा के रूप में पेश की जा रही है, जो बेखौफ होकर हमारे समय के सबसे उग्र सवालों में से एक को उठाती है और वो है “79 साल की आज़ादी के बावजूद क्या हम अब भी बौद्धिक आतंकवाद के ग़ुलाम हैं?”

फिल्म का संगीत रोहित शर्मा और राहुल देव नाथ ने तैयार किया है। यह सिर्फ एक पीरियड या ऐतिहासिक फिल्म नहीं है, यह एक सिनेमैटिक डिबेट है, जो फिल्म को रुपहले पर्दे के साथ ऐतिहासिक मुद्दों को गहराई से देखते हुए सामाजिक टिप्पणी को ऐतिहासिक तथ्यों के पुनर्मूल्यांकन के साथ जोड़ती है और यह सुनिश्चित करती है कि यह फिल्म भले ही नाटकीय हो, किन्तु विचारोत्तेजक होगी।

फिलहाल ‘द ताज स्टोरी’ भव्य पैमाने पर 31 अक्टूबर 2025 को पूरे भारत में रिलीज़ होने जा रही है, जो र्शकों को सोचने, सवाल करने और शायद इतिहास और आज़ादी को देखने का एक नया दृष्टिकोण देगी।

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